क्यो बेटियो को देवी का दर्जा दे रखा है
क्यो बेटियो की शान मै समाज कसीद पङता है
मेरा धिक्कार है ऐसे समाज परइन समाज
कर्ताओ पर जो आज भी दहेज जैसे कुरीति
की समाप्त करने का साहस नहीं कर पा रहें है
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क्यो बेटियो को देवी का दर्जा दे रखा है
क्यो बेटियो की शान मै समाज कसीद पङता है
मेरा धिक्कार है ऐसे समाज परइन समाज
कर्ताओ पर जो आज भी दहेज जैसे कुरीति
की समाप्त करने का साहस नहीं कर पा रहें है
अगर कोई बङा देश छोटे देश को दबाता है तो मै छोटे देश के साथ खङा रहुँगा
अगर उस छोटे देश का बहुसंख्यक धर्म वहाँ के अल्पसंख्यक धर्म को दबाता है
तो मै अल्पसंख्यक धर्म के साथ खङा होना पसंद करूँगा
अगर उस अल्पसंख्यक धर्म जातियाँ किसी जाति को दबाती है तो मै उस जाति के साथ खङा रहुँगा
अगर उस जाति मै कोई मालिक अपने कामगार का उत्पीङन करता है तो मै उस कामगार के साथ खङा रहुँगा
अगर वो कामगार घर जाकर अपनी पत्नी को पीटता है तो मै उस औरत के साथ खङा रहुँगा
मेरे मुख्य दुश्मन उत्पीङन और अत्याचार है
हम हार क्यों गए स्पार्टाकस
पुछा था बुढिया ने
मरते हुए स्पार्टाकस से
हम तो लङे थे
कमजोरो के लिए
आजादी और जाने कितने
अब बेमानी उसूलों के लिए
फिर हार क्यों गए स्पार्टाकस
स्पार्टाकस की खून की बूंदे
गिर गीला कर रहीं थी बुढिया के सफेद बाल
उसने सूखे गले से बोलना चाहा
पर कह न सका कि सच जीतेगा इसलिए उसकी तरफ
नही खङे रहते
बहुत बार हारता है सत्य
जब भी वो रखता है कदम किताबो के बाहर
तुम्हारी हीरो वाली गाथाओ के
बाहर बहुत बार मार भी दिया जाता है सच
देश चलता नहीं मचलता है
मुधा हल नहीं होता उछलता है
जंग मेदाँ मै नहीं
सोशल मीडिया पर जारी है
आज मेरी तो कल तेरी बारी है
दिया गया बाजारो का तनाव मार डालेगा
किसानों को ये कर्ज का घाव मार डालेगा
बेरूखे मोसम से फसले बच गयी तो देखना
मंडीयों मै उपज का कम भाव मार डालेगा
अठाने मै अभी बिकेगा गोदामों मै जाते जाते
फिर बच्चो को अन्न का अभाव मार डालेगा
खुदखुशी किये उस बाप को अब क्या खवर
सीमा पे उसके बेटे को चुनाव मार डालेगा
मुर्दा की तरह जाना तुम दफ्तरो मै अन्नदाता
जिदा दिखे तो बाबूओ का बर्ताव मार डालेगा
चुप रहना गुनाह है इस गपवाजी के दौर मै
खामोशी को गुनाह का दबाब मार डालेगा
उन्होने कहा था कि पिस्तोल और बम इंकलाव नहीं लाते
क्या हम तैयार है उनके इस विचार को स्वीकार करने के
लिये नहीं तो चमक दमक की राजनीति आपका
इंतजार कर रही है
किसानों की फसल के दाम व्यापारी मंडी
समर्थन मूल से भी कम लगाते है इस पर सभी
किसानों को आंदोलन करना चाहिए मंडी मै
समर्थन मूल्य से कम मै फसल नहीं बिकनी चाहिए
कान मै एक दिन मेरे ऊँचाईया कहने लगी
कद बढा किरदार का अच्छाईया कहने लगी
कोशिशे हो लाख लेकिन सच हमेशा सच रहा
हार मत हिम्मत कभी सच्चाई कहने लगी
मुश्किलों मै साथ कोई कब रहा है आजतक
चल अकेला रात भर परछाईया कहने लगी
से रहा था जब पिता पगङी जमीं को सौपकर
सुर सम्भालूं किस तरह शहनाईया कहने लगी
दासता तुमने मिटा दी उन शहीदो की मगर
नौजवानों जुबां कुरबानियाँ कहने लगी
गरीबो की आहे ये बच्चों की चीखे
रूलाये नहीं तो वो इंसान कैसा
रहे चुप हमेशा जो अन्याय पर भी
कहाँ वो हुकूमत ये भगवान कैसा
हमारे घरो का सिसकता हैं बचपन
सुनो हस्पतालों ये इंतजाम कैसा उगाकर खिलाये बनाकर खिलाये
निकाला हैं किसने ये फरमान कैसा
गिरा दो ये नफरत की दीवार जल्दी
थको ना रूको ना ये आराम कैसा
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मनीष श्रीवास्तव ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
हराभरा रहे चमन नये साल मै
दुर हो नफरतो की सियासी हवा
सिसके नही बचपन नये साल मै
मुक्त भी हो जुल्म से अपना जहां
झूम उठे धरती गगन नये साल मै
हो न महरूम कोई रोटी मकान से
ढक सेक हर बदन नये साल मै
खत्म हो बुराईया इस समाज से
हो प्यार अपनापन नये साल मै
🙏 हैप्पी न्यू ईयर 🙏
चीजे याद पुरानी मत कर ,
घर बाहर नादानी मत कर,
बाबा को हो जाती चिता,
बिटिया बात सयानी मत कर,
बच्चे के सामने एक पिता को,
सेठ इतना पानी मत कर,
डूब चुकी है कर्ज मै गर्दन,
लगता यार किसानी मत कर!
,,,,,,,,,,,,,,,मनीष श्रीवास्तव ,,,,,,,,,,,,,,,,,
सौ मै सत्तर आदमी
फिलहाल जब नाशाद हैं
दिल पे रखकर हाथ कहिये
देश क्या आजाद है सौ मै सत्तर
कोठीयों से मुल्क के
मेयार को मत आंकिये
असली हिंदुस्तान तो
फुटपाथ पर आवाद हैं सौ मै सत्तर आदमी
सत्ताधारी लङ पङे हैं
आज कुत्तो की तरह
सुखी रोटी देखकर
हम मुफ्लिसो के हाथ मै सौ मै सत्तर आदमी
जो मिटा पाया न अब तक
भूख के अवसाद को
दफन कर दो आज उस
मफ्लूश पूंजीवाद को सौ मै सत्तर आदमी बुढा बरगद साछी हैं
गांव की चौपाल पर
रमसुढी की झोपङी भी
ढह गई चौपाल मै सौ मै सत्तरआदमी
जिस शहर के मुत्ताजिम अंधे हो है सौ मै सत्तर आदमी
फाइलो के जाल मैं रोशनी वो गांव तक
पहुँचेगी कितने साल मै सौ मै सत्तर आदमी
Seventy seven hundred
For the time being
Keep your hands on your heart
What country is free, I am seventy
From the cells of the country
Don't judge meyer
Real India
Hundred and seventy men are on the sidewalk
Have got the ruling
Like dogs today
Seeing happy bread
I am seventy men in the hands of Muflico
Which has not been erased till now
Hunger depression
Bury him today
Mufflush capitalism has grown to seventy men in a banyan tree
On the village chaupal
Ramsudhi's hut also
Collapsed chaupal me hundred seventy man
The city, whose people are blind hundred and seventy men
That is confused
To the village of lights in the web of files
In how many years will I reach seventy men
खुशियो को मुठ्ठी मै कस ले
बेटो आज गमो पर हँस ले
भूले कङवी याद पुरानी छोङो
भी अब दर्द बयानी मिटा दे
हर झुर्री की सिलवट सुलझाएं माजी
की हर लट ख्वावो की ऑखो मैं बस ले वैटो
आज गमो पर हँस ले फिक् यहाँ किसको हैं
कल की हाथ नहीं जब घङिया पल की जीत हार
ये शब्द झूट हैं फूल खार अब नहीं टूंढ है काट चुके बोयी जो फस्ले बैटो आज गमो पर ले जिस्म रूह भी खो
जाएॅगे कब तक शिकवे ढो पाएॅगे जब्त न खाना दर्द न पीना जीना है तो छक कर जीना सुन ले आने वाली नस्ले बैटी आज गमो पर हँस ले
Tighten happiness
Beto laugh today at laugh
Forget old memories
Now also eradicate the pain
of pain, solve the wrinkles of
every wrinkle, I just have to take care of every dream, I just take vato today, laugh at the cheek! Have harvested the fowl that will take on the heat today, the body soul will also be lost, how long will you be able to bear the
..............मनीष श्रीवास्तव .................
It is also less that hungry does not allow gold, what happens, it does not let the velvet bed, it does not sell toys; the same father of the children does not give toys to his children. There is a merchant with a man, he does not allow the blind people to have their share in the morning. I am in control of my heart
गुमसुम एक
तुमसे ऑखो का पानी बोले ,,
देखकर ये अन्याय शोषण ,,,
अब तो यार जवानी बोले
वहना देख रही है रस्ता ,आज निभा राखी का रिस्ता ,,
अस्मत लूटते देखे दुनिया ,,,
तू आ जा बनकर फरिश्ता ,,,,
मासूम खू़ंं कि रबानी बोले ,,,,,
अब तो यार जवानी बोले ,,,,,,
अन्नदाता जो है खेतो मै,
एङी रगङे जो रेतो मै ,,
फँसी हुई मेहनत उसकी,,,
कुछ कोटी मै कुछ सेटी मै ,,,,
मुु्क्त करा दो उनके सीम को ,,,,,
तुमसे खेतो किसानी बोले ,,,,,,
अब तो यार जवानी बोले ,,,,,,,
जला गयेे वो वस्ती सारी ,बरछी माँ के पेट मेै मारी ,,
फिर क्या धर्मे के नारे उछले ,,,
कट्टर ही हत्यार निकले,,,,
अनाथ हो गया है जो बचपन ,,,,,
उसकी करूण कहानी बोले ,,,,,,
अब तो यार जवानी बोले ,,,,,,,
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,(मनीष श्रीवास्तव),,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,