शनिवार, 9 जनवरी 2021

चीजे याद पुरानी मत कर

 चीजे याद पुरानी मत कर

घर बाहर नादानी मत कर

बाबा को हो जाती है चिंता

बिटिया बात सयानी मत कर




बच्चे के सामने एक पिता को

सेठ तू इतना पानी मत कर

डूब चुकी है कर्ज में गर्दन

लगता यार किसानी मत कर


जो कहना है कह भी दे यार

पर ऐसे खत्म कहानी मत कर

शनिवार, 19 दिसंबर 2020

क्यो बेटियो को देवी का दर्जा दे रखा है

 क्यो बेटियो को देवी का दर्जा दे रखा है 

क्यो बेटियो की शान मै समाज कसीद पङता है 




मेरा धिक्कार है ऐसे समाज परइन समाज 

कर्ताओ पर जो आज भी दहेज जैसे कुरीति

की समाप्त करने का साहस नहीं कर पा रहें है 



अगर कोई बङा देश छोटे देश को दबाता है

 अगर कोई बङा देश छोटे देश को दबाता है तो मै छोटे देश के साथ खङा रहुँगा

अगर उस छोटे देश का बहुसंख्यक धर्म वहाँ के अल्पसंख्यक धर्म को दबाता है

तो मै अल्पसंख्यक धर्म के साथ खङा होना पसंद करूँगा

अगर उस अल्पसंख्यक धर्म जातियाँ किसी जाति को दबाती है तो मै उस जाति के साथ खङा रहुँगा 



            



      

अगर उस जाति मै कोई मालिक अपने कामगार का उत्पीङन करता है तो मै उस कामगार के साथ खङा रहुँगा 

अगर वो कामगार घर जाकर अपनी पत्नी को पीटता है तो मै उस औरत के साथ खङा रहुँगा 

मेरे मुख्य दुश्मन उत्पीङन और अत्याचार है

हम हार क्यों गए

 हम हार क्यों गए स्पार्टाकस

 पुछा था बुढिया ने 

मरते हुए स्पार्टाकस से             


हम तो लङे थे 

कमजोरो के लिए 

आजादी और जाने कितने 

अब बेमानी उसूलों के लिए 

फिर हार क्यों गए स्पार्टाकस

स्पार्टाकस की खून की बूंदे

गिर गीला कर रहीं थी बुढिया के सफेद बाल

उसने सूखे गले से बोलना चाहा

पर कह न सका कि सच जीतेगा इसलिए उसकी तरफ 

नही खङे रहते 

बहुत बार हारता है सत्य

जब भी वो रखता है कदम किताबो के बाहर 

तुम्हारी हीरो वाली गाथाओ के 

बाहर बहुत बार मार भी दिया जाता है सच

सोमवार, 14 दिसंबर 2020

इंसान

देश चलता नहीं मचलता है

 मुधा हल नहीं होता उछलता है

जंग मेदाँ मै नहीं 


सोशल मीडिया पर जारी है 

आज मेरी तो कल तेरी बारी है





(किसान) दिया गया बाजारो

 दिया गया बाजारो का तनाव मार डालेगा

किसानों को ये कर्ज का घाव मार डालेगा 

बेरूखे मोसम से फसले बच गयी तो देखना 

मंडीयों मै उपज का कम भाव मार डालेगा 

अठाने मै अभी बिकेगा गोदामों मै जाते जाते 

फिर बच्चो को अन्न का अभाव मार डालेगा 

खुदखुशी किये उस बाप को अब क्या खवर






सीमा पे उसके बेटे को चुनाव मार डालेगा

मुर्दा की तरह जाना तुम दफ्तरो मै अन्नदाता

जिदा दिखे तो बाबूओ का बर्ताव मार डालेगा 

चुप रहना गुनाह है इस गपवाजी के दौर मै

खामोशी को गुनाह का दबाब मार डालेगा