हम हार क्यों गए स्पार्टाकस
पुछा था बुढिया ने
मरते हुए स्पार्टाकस से
हम तो लङे थे
कमजोरो के लिए
आजादी और जाने कितने
अब बेमानी उसूलों के लिए
फिर हार क्यों गए स्पार्टाकस
स्पार्टाकस की खून की बूंदे
गिर गीला कर रहीं थी बुढिया के सफेद बाल
उसने सूखे गले से बोलना चाहा
पर कह न सका कि सच जीतेगा इसलिए उसकी तरफ
नही खङे रहते
बहुत बार हारता है सत्य
जब भी वो रखता है कदम किताबो के बाहर
तुम्हारी हीरो वाली गाथाओ के
बाहर बहुत बार मार भी दिया जाता है सच

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