शनिवार, 19 दिसंबर 2020

हम हार क्यों गए

 हम हार क्यों गए स्पार्टाकस

 पुछा था बुढिया ने 

मरते हुए स्पार्टाकस से             


हम तो लङे थे 

कमजोरो के लिए 

आजादी और जाने कितने 

अब बेमानी उसूलों के लिए 

फिर हार क्यों गए स्पार्टाकस

स्पार्टाकस की खून की बूंदे

गिर गीला कर रहीं थी बुढिया के सफेद बाल

उसने सूखे गले से बोलना चाहा

पर कह न सका कि सच जीतेगा इसलिए उसकी तरफ 

नही खङे रहते 

बहुत बार हारता है सत्य

जब भी वो रखता है कदम किताबो के बाहर 

तुम्हारी हीरो वाली गाथाओ के 

बाहर बहुत बार मार भी दिया जाता है सच

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