गुरुवार, 10 दिसंबर 2020

कान मै एक दिन मेरे ऊँचाईया कहने लगी

 कान मै एक दिन मेरे ऊँचाईया कहने लगी

 कद बढा किरदार का अच्छाईया कहने लगी


कोशिशे हो लाख लेकिन सच हमेशा सच रहा

हार मत हिम्मत कभी सच्चाई कहने लगी 


मुश्किलों मै साथ कोई कब रहा है आजतक

चल अकेला रात भर परछाईया कहने लगी

 

से रहा था जब पिता पगङी जमीं को सौपकर


 सुर सम्भालूं किस तरह शहनाईया कहने लगी 



दासता तुमने मिटा दी उन शहीदो की मगर 

नौजवानों जुबां कुरबानियाँ कहने लगी

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