मंगलवार, 8 दिसंबर 2020

गरीबो की आहे ये बच्चों की चीखे

 गरीबो की आहे ये बच्चों की चीखे 

रूलाये नहीं तो वो इंसान कैसा 


रहे चुप हमेशा जो अन्याय पर भी 

कहाँ वो हुकूमत ये भगवान कैसा 


हमारे घरो का सिसकता हैं बचपन 

सुनो हस्पतालों ये इंतजाम कैसा उगाकर खिलाये बनाकर खिलाये 




निकाला हैं किसने ये फरमान कैसा 

गिरा दो ये नफरत की दीवार जल्दी 


थको ना रूको ना ये आराम कैसा


,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,मनीष श्रीवास्तव ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

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