गुरुवार, 26 नवंबर 2020

कर्जदार किसान

 चीजे याद पुरानी मत कर ,

घर बाहर नादानी मत कर,


बाबा को हो जाती चिता,

बिटिया बात सयानी मत कर,



बच्चे के सामने एक पिता को,

सेठ इतना पानी मत कर,


डूब चुकी है कर्ज मै गर्दन,

लगता यार किसानी मत कर!


,,,,,,,,,,,,,,,मनीष श्रीवास्तव ,,,,,,,,,,,,,,,,,

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