शुक्रवार, 13 नवंबर 2020

KISANO KEE DILO KI DASTAYEN

 

  गुमसुम एक 


कहानी बोले ,

तुमसे ऑखो का पानी बोले ,,

देखकर ये अन्याय शोषण ,,,

अब तो यार जवानी बोले 

वहना देख रही है रस्ता ,

आज निभा राखी का रिस्ता ,,

अस्मत लूटते देखे दुनिया ,,, 

तू आ जा बनकर फरिश्ता ,,,,

मासूम खू़ंं कि रबानी बोले ,,,,,

अब तो यार जवानी बोले ,,,,,,


अन्नदाता जो है खेतो मै,

एङी रगङे जो रेतो मै ,,

फँसी हुई मेहनत उसकी,,,

कुछ कोटी मै कुछ सेटी मै ,,,,

मुु्क्त करा दो उनके सीम को ,,,,,

तुमसे खेतो किसानी बोले ,,,,,,

अब तो यार जवानी बोले ,,,,,,,

जला गयेे वो वस्ती सारी ,

बरछी माँ के पेट मेै मारी ,,

फिर क्या धर्मे के नारे उछले ,,,

कट्टर ही हत्यार निकले,,,,

अनाथ हो गया है जो बचपन ,,,,,

उसकी करूण कहानी बोले ,,,,,,

अब तो यार जवानी बोले ,,,,,,,


,,,,,,,,,,,,,,,,,,,(मनीष श्रीवास्तव),,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,


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